वाशिंगटन। अमरीका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने अमरीकी कंप्यूटर नेटवर्क को साइबर अपराधों से बचाने के लिए योजना की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि अब से अमरीका के डिजीटल बुनियादी ढाँचे को राष्ट्रीय रणनीतिक महत्व दिया जाएगा। अमरीकी में व्हाइट हाउस में साइबर सेक्युरिटी कार्यालय खोला जाएगा। पिछले कुछ सालों में अमरीकी सरकारी संस्थाओं और सेना के कई विभागों ने शिकायत की है कि उनके नेटवर्क के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई है।बराक ओबामा ने कहा है कि अमरीका के डिजीटल ढाँचे, नेटवर्क और कंप्यूटरों को सुरक्षित रखना राष्ट्रीय सुरक्षा के हिसाब से प्राथमिकता रहेगी। उन्होंने कहा, "हम सुनिश्चित करेंगे कि ये नेटवर्क सुरक्षित हो। और अगर हैकिंग होती है तो जल्द ही उस नुकसान को कम किया जा सके।" ओबामा ने कहा कि आतंकवाद को अंजाम देने के लिए अब कंप्यूटर को केवल क्लिक करना पड़ता है। उन्होंने इसे विनाशकारी हथियार की संज्ञा देते हुये कहा कि "साइबर की दुनिया कोई काल्पनिक दुनिया नहीं है। इससे पैदा होने वाले खतरे भी वास्तविक हैं, ये सूचना और प्रौद्योगिकी दौर की बड़ी विडंबना है। जो तकनीक हमारे हाथ मज़ूबत करती है वही विनाश भी कर सकती है।" गौरतलब है कि अमरीका अपने काम काज के लिए काफ़ी हद तक कंप्यूटर नेटवर्क पर निर्भर करता है और साइबर हैकिंग होने के खतरा बना रहता है। 2007 में ही पेंटागन ने करीब 44000 हज़ार ऐसी घटनाएँ की जानकारी दी थी जिसमें विदेशी मिलिशिया, हैकरों ने साइबर अपराध किए थे। प्रस्तावित साइबर सेक्युरिटी कार्यालय में कई अरब डॉलर लगाए जाएँगे जिसमें सरकारी कंप्यूटरों तक पहुँच रोकने की कोशिश की जाएगी, साथ ही स्टॉक एक्सचेंज और एयर ट्रैफ़िक कंट्रोल सिस्टम से जुड़े कंप्यूटरों को भी सुरक्षित रखा जाएगा।

