Saturday, October 25, 2008

जेल मे दुकान....

पटना। कैदियों को चीनी, नमक, ब्लेड, मोमबत्ती या दैनिक जरूरत की दूसरी चीजें जेल में ही उपलब्ध हो जाएंगी। जेलों को सुधार गृह बनाने की परिकल्पना के बीच सरकार जेलों में जनरल स्टोर खोलने जा रही है। हालांकि कैदियों को उनकी जरूरत का सामान लेने को पैसे अदा करने होंगे।

कैदियों के प्रति मानवाधिकार को लेकर बढ़ते दबाव के बीच जेलों में लगातार सुविधाओं में वृद्धि हो रही है। कुछ जेलों में लाइब्रेरी खोले गए हैं। योग के क्लास चल रहे हैं। बच्चों के खेल-कूद के लिए झूले की व्यवस्था हुई और हो रही है। कुछ माह पूर्व पटना सहित कतिपय जेलों में सुधार के बूथ खोले गए हैं जहां से बंदी दूध, पेड़े, लस्सी का लुत्फ उठा रहे हैं। खास बात यह भी जेलों में बंद महिला कैदियों के लिए सेनेटरी नैपकिन की भी आपूर्ति की जाने वाली है। मानवीय दृष्टिकोण से इस दिशा में पहल की गयी है। पहली बार किसी जेल में इसकी आपूर्ति होगी। सेनेटरी नैपकिन या जनरल स्टोर के बारे में विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। थोड़ी सी औपचारिकता के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
जानकार बताते हैं कि जेलों में खाना बनाने के लिए भोजन सामग्री आपूर्ति की अपनी व्यवस्था है। उसका अलग 'अर्थ तंत्र' है। जिससे आपूर्ति और खपत के सिस्टम में गैप आता रहता है। इस व्यवस्था के कारण नमक, चीनी जैसी मामूली मगर जरूरी चीजों के लिए कैदियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जेल विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जेल में दरी-कालीन बनाने, बेकरी और दूसरे तरह के कारखाने संचालित हैं। इसके अतिरिक्त दूसरे तरह के काम करने होते हैं जिसके एवज में कैदियों को पैसे मिलते हैं। यह राशि जेल अधिकारी के पास ही जमा हो जाते हैं। जेलों में पारचूनी दुकान खोलने से लोगों को जरूरत की चीजें मिल जाएंगी तो जेल अधिकारी के पास जमा पैसे से उसका भुगतान हो जाएगा।

बिक सकता है एक मासूम

अलीगढ़। एक मां के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि उसे अपने मासूम बच्चे को बेचने का निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़े। दरअसल इसकी विवशता यह है कि उसे ससुराल वाले ठुकरा चुके हैं और मायके वालों ने मुंह मोड़ लिया है। वह अपने दो बच्चों की परवरिश नहीं कर सकती। मानसिक रूप से अस्वस्थ यह महिला दो बार खुदकुशी का प्रयास कर चुकी है। अब महिला सेल में उसने न्याय की गुहार लगाई है। यदि कहीं से सहारा न मिला तो उसे अपनी बच्ची को पांच हजार रुपये में बेचने को मजबूर होना पड़ेगा।
यह पीड़ा नगला जाहर, लेखराज नगर निवासी पुष्पा की है, जिसकी शादी बारह साल पहले रेलवे रोड निवासी गगन से हुई थी। पुष्पा के पास चार साल का पुत्र व आठ माह की पुत्री है। पुष्पा मिर्गी रोग से पीड़ित है। एक रोगी को समुचित इलाज मिलने के साथ भावनात्मक संबल भी जरूरी होता है, मगर उसे हर तरफ से ठोकरें मिल रही हैं। इसके चलते वह कभी-कभी आपा खो बैठती है। ऐसी हरकतें करने लगती है कि लोग उसे विक्षिप्त मान लेते हैं। इसी वजह से पुष्पा का अपने पति व ससुराल वालों से विवाद होता रहता था। हालत यह हो गई कि पति उसे छोड़कर मुंबई चला गया। तब से वह अपने दोनों बच्चों के साथ मायके में रहने आ गई। हालांकि मायके वालों ने उसका इलाज भी कराया, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। पति के मुंह मोड़ने और बीमारी से त्रस्त पुष्पा ने दो बार आग लगाकर खुदकुशी करने का प्रयास भी किया। एक बार तो उसकी इसी नासमझी के चलते घर में आग लग गई थी, जिसे बुझाने के लिए दमकल बुलानी पड़ी थी। इन वजहों से मायके वालों ने भी उससे मुंह मोड़ना शुरू कर दिया। उसने खुद को तो हालात के हवाले कर दिया, मगर दो बच्चों की परवरिश की चिंता उसे सताने लगी है। जब कोई चारा न सूझा तो उसने मायके में रहते हुए ही अपने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की शिकायत की। आरोप लगाया कि दहेज की मांग पूरी न होने पर ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया है। शुक्रवार को उसे मायके से भी निकाल दिया गया तो वह दोनों बच्चों के साथ महिला सेल जा पहुंची। वहां उसका कहना था कि वह पति के साथ रहना चाहती है, मगर पति की बेरुखी के बाद अब मायके में भी रह पाना मुश्किल हो रहा है। उसकी पीड़ा हर किसी को झकझोर देने वाली थी। उसका कहना था कि बच्चों की परवरिश उसके लिए भारी साबित हो रहा है। बेटी के लिए दूध तक को रुपये नहीं हैं। उसकी बेटी के उसे पांच हजार रुपये मिल रहे हैं। वह उसे किसी अच्छे परिवार कों सौंपना चाहती है ताकि उसका जीवन संवर सके। मासूम बच्ची व महिला की दशा देख हर कोई अचंभित था। महिला सेल प्रभारी अंजू तेवतिया ने एक सिपाही को पुष्पा के मायके भेजा ताकि वे पुष्पा को घर ले जाएं परंतु वहां से कोई आने को तैयार नहीं हुआ। महिला सेल प्रभारी ने बताया कि पुष्पा के मायके वालों ने साफ कह दिया कि वे पुष्पा की हरकतों से आजिज आ चुके हैं और अब वे उसे घर पर नहीं रख सकते।

चांद के करीब पहुंचा चंद्रयान

बेंगलूर। भारत के अंतरिक्ष यान चंद्रयान-1 ने चांद की ओर बढ़ने की अपनी यात्रा का 20 फीसदी हिस्सा पूरा कर लिया है। इसरो के वैज्ञानिकों ने शनिवार कक्षा बढ़ाने का दूसरा प्रयास पूरा किया।
इस अंतरिक्ष यान के 440 न्यूटन लिक्विड इंजन को सुबह पांच बजकर 48 मिनट पर 16 मिनट तक चलाया गया। इसरो के प्रवक्ता एस सतीश ने कहा कि इंजन के इस तरह चलाने से चंद्रयान-1 का एपोजी यानी शिरोबिंदु 74 715 किलोमीटर तक जबकि पेरिजी यानी भूमिनीच बिंदु 336 किलोमीटर हो गया।
इसरो के अध्यक्ष जी माधवन नायर ने कक्षा बढ़ाने के शनिवार के अभियान को रिकार्ड तोड़ने वाला करार दिया। अंतरिक्ष विभाग के सचिव नायर ने कहा कि अब तक भारत के उपग्रह 36000 किलोमीटर की ऊंचाई को छू चुके हैं। आज इंजन चलाने से चंद्रयान-1 कोई 75000 किलोमीटर तक चला गया। यह अब तक जो हासिल किया गया है उससे कहीं आगे है। यह एक अच्छा आयोजन था जो बिना किसी त्रुटि के पूरा हो गया।
भारत के पहले मानव रहित चंद्र अभियान की जटिलता की ओर संकेत देते हुए नायर ने कहा कि जब अंतरिक्ष यान पृथ्वी से नजदीक होता है तो उसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र सुपरिभाषित होता है और वैज्ञानिक उसके प्रक्षेप-पथ [ट्रेजेक्ट्री] को आकार दे सकते हैं। नायर ने कहा कि जब आगे बढ़ते चले जाते हैं पृथ्वी का प्रभाव कम होता जाता है। चांद और सूर्य के असर का प्रभुत्व हो जाता है। यहां तक कि अन्य ग्रहों का भी उस पर असर पड़ता है। चंद्रमा पृथ्वी से 384000 किलोमीटर की दूरी पर है। इसरो के अधिकारियों का कहना है कि चंद्रयान-1 के चंद्रमा की कक्षा में आठ नवंबर को स्थापित हो जाने की उम्मीद है जो चांद की सतह से 100 किलोमीटर की ऊंचाई पर है।
इसरो ने कहा कि गत 22 अक्तूबर को छोड़े गए अंतरिक्ष यान की सभी प्रणालियां ठीक तरह से काम कर रही हैं। चंद्रयान-1 को अब भी और ऊंची कक्षा में ले जाने के लिए अगले कुछ दिनों में प्रयास होने की योजना है।

टीआरपी के लिये नया तमाशा

नोएड़ा। एक ख़बर...सॉरी...."मसाला" बिकने को तैयार है। झमाझम और झोली भर टीआरपी के साथ। बिल्कुल तमाशाई अंदाज़ में। लेकिन ख़रीदार चाहिए। कलेजे वाला। ये आइडिया हिट होगा इसकी गारंटी। अब आप सोच रहे होंगे कि आख़िर कौन सी ख़बर है जिसके चलने से पहले ही टीआरपी का लंबा-चौड़ा सपना दिखाया जा रहा है। तो सोचिए..। दीमाग लगाइए। वैसे कुछ ख़ास बचा नहीं है। सांप की शादी। भूतों का हनीमून। मंगर पर पानी। सूरज की तपिश और दुनिया का नाश। हवन से बारिश। गप्पु नाचे-झमाझम। ये तमाम तमाशे पहले ही हो चुके हैं। तांत्रिकों का पाखंड। रत्नों का खेल तमाम तमाशे इस देश की जनता ने देख लिए हैं। ख़बरों को टटोलने वाले हाथ रिमोट के बटन एक-एक कर कितनी ही बार दबा लें हर नई दुकान ऐसा ही पकवान परोसे बैठे हैं। ऐसे में नया क्या है? ज़ाहिर है सवाल बेहद मुश्किल है। लेकिन एक कमाल का आइडिया एक बेहद आम और डाउन मार्केट दर्शक की जुबां ने उगला है। वो कहता है कि कोई चैनल अपने स्टूडियो में बंदर का नाच क्यों नहीं दिखा देता? मदारी के साथ बंदर का नाच..। वो भी लाइव। मजा आ जाएगा। वैसे इस डाउन मार्केट वियूवर के विचार गौर करन लायक हैं। ज़रा सोचिए...। हममें से कितने लोग आज बंदर के साथ है।
(राजेश चौहान)

Tuesday, October 21, 2008

दीवारों में कैद कुछ सपने

लखनऊ। बच्चों की यह कुछ अलग दुनिया है। यहां इन बच्चों की मासूम आंखें होली की रंगीनियां और दीपावली की चकाचौंध नहीं जानती। इनके लिये दशहरा, दीपावली और ईद बस किताबों के पन्नों में दर्ज हैं। त्यौहार के दिन इनके बाल गृह की चहारदीवारी के भीतर जो कुछ भी होता वही इनके लिये पर्व है। निराश्रित गृहों में रहने वाले बच्चों की दुनिया उनके आश्रम तक ही सिमटी हुई है। त्यौहारों पर नये कपड़े के लिये मचल उठना और मनपंसद पकवान के लिये जिद करना इन बच्चों को पता ही नहीं है।
निराश्रित गृहों में रहने वाले बच्चों की दुनिया बस एक चहारदीवारी के भीतर ही सिमटी हुई है। यहीं इन बच्चों की सुबह शुरू होती है और यहीं शाम हो जाती है। त्यौहारों की मस्ती और धमाचौकड़ी का इनकी जिदंगी में कोई मायने नहीं है। इनका बाल मन बस इतना ही जानता है कि होली हो या दीवाली उन्हें खाने के लिये रोज से हटकर कुछ अलग पकवान मिलते हैं और इस दिन पढ़ाई भी नहीं करनी पड़ती। दीपावली के दिन पटाखे और खील-मिठाई मिल जाए इसके लिये इन बच्चों को प्रार्थना करनी पड़ती है। कोई दानदाता पटाखे और खिलौने दे गया तो ये भी उसका मजा ले लेते हैं। पिछली बार कुछ लोगों ने पटाखे और मिठाइयां दीं तो उनका भी पर्व उल्लास से भर गया। इस बार दशहरे में उन्हें निराशा ही हाथ लगी। कोई उनके उल्लास को बढ़ाने नहीं आया। दशहरे के दिन ये बच्चे अपने कमरे की खिड़की पर लटक कर मेले में जाते लोगों के हुजूम को देखकर स्वयं उसमें शामिल होने की कल्पना ही करते रह गये। अब बच्चों को दीवाली का इंतजार है। छह साल की कल्पना इस बार भी पटाखे और खिलौने मिलने की बाट जोह रही है। सात साल का गौरव कहता है कि ईद और दीपावली के दिन वह लोग आपस में मौजमस्ती कर लेते है लेकिन कभी बाहर घूमने नहीं जाते। बीते दिनों वाइल्ड लाइफ वीक के दौरान चिड़ियाघर प्रशासन की ओर से इन बच्चों को चिडि़याघर दिखाया गया। चिड़ियाघर घूमना इन बच्चों के लिये सपनों सरीखा था। इनमें से कुछ बच्चे ऐसे थे जिन्होंने महीनों बाद बालगृह की चौखट से बाहर कदम रखा था। उस सैर के हसीन सपने अभी भी इनके मन में तैर रहे है। वहीं राजकीय बाल गृह के अधीक्षक जयपाल वर्मा कहते हैं कि त्यौहारों के अवसर पर बच्चों के लिये विशेष प्रकार के खानपान की व्यवस्था ही जाती है लेकिन किसी प्रकार का अतिरिक्त बजट न होने के कारण इन बच्चों को घुमाने के लिये बाहर नहीं ले जाया जाता है।

सिगरेट के ख़िलाफ़ फतवा

देवबंद(सहारनपुर)। सिगरेट के हर पैकेट पर वैधानिक चेतावनी लिखी होती है, 'सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।' अब दारुल उलूम ने फतवा दिया है कि यदि सिगरेट पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है तो इसे पीना नाजायज़ है। यह फतवा कम से कम स्वास्थ्य मंत्रालय के वास्ते तो फीलगुड है।
दारुल उलूम के आनलाइन फतवा विभाग से एक व्यक्ति ने सवाल किया था कि क्या सिगरेट पीना हराम है? मैंने सुना है कि सिगरेट मुबाह है? मुफ्ती-ए-कराम ने शरीयत की रोशनी में जवाब देते हुए फतवा संख्या 796 के माध्यम से कहा कि सिगरेटनोशी अगर सेहत के लिए नुकसानदायक हो तो नाजायज है और मुजिर (नुकसानदायक) न हो तब भी बिला जरूरत सिगरेट पीना (शौकिया तौर पर) मकरूह (नापसंदीदा अमल) है।
वहीं, अन्य मुफ्ती-ए-कराम ने फतवे का समर्थन करते हुए कहा कि शरीयत के मुताबिक बिना किसी खास जरूरत शौकिया तौर पर सिगरेट या हुक्का पीना मकरूह है। इसके अलावा सिगरेट या हुक्का पीना यदि सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो तो सिगरेट, हुक्का पीना जायज नहीं है, लेकिन बहुत से मामलों में पेट संबंधी बीमारियों में हुक्का या सिगरेट पीना कारगर साबित होता है। ऐसे हालात में हकीम या चिकित्सक के परामर्श से इजाजत के बाद सिगरेट या हुक्का पीना जायज है। अब धूम्रपान करने वालों के समक्ष सवाल ये है कि वे ऐसा चिकित्सक कहां से लाएं जो धूम्रपान को स्वास्थ्य के प्रति लाभदायक बताए।

शान्ति का संदेश लेकर आए जापानी

नोएडा. दुनिया भर में शांति का संदेश देने निकला छह सदस्यीय जापानी प्रतिनिधिमंडल सोमवार को रॉकवुड स्कूल पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने यहां शांति स्तंभ की स्थापना की व बच्चों को शांति का संदेश दिया। इस अवसर पर बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत कर प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।
शांति का संदेश देने निकले जापानी प्रतिनिधिमंडल में जापान सरकार के विभिन्न विभाग के छह लोग हैं, जिसका नेतृत्व प्रो. योशिदा कर रहे हैं। इस प्रतिनिधिमंडल को कुल 194 देशों में शांति स्तंभ स्थापित करना है, जिसमें से सौ देशों में यह काम पूरा किया जा चुका है। प्रतिनिधिमंडल ने मदर टेरेसा के आश्रम में भी शांति स्तंभ स्थापित किया है। रॉकवुड स्कूल में शांति स्तंभ की स्थापना के बाद बच्चों को दलाईलामा व जान पाल के शांति संदेश की शिक्षा भी दी गई। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे प्रो. योशिदा ने कहा कि शांति स्थापना में युवा महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए जरूरी है उन्हें सही व अच्छी शिक्षा प्रदान की जाए।

Friday, October 17, 2008

आगरा के नए एसएसपी की मुहीम

आगरा। जिले के नवागत एसएसपी प्रेम प्रकाश ने अपने काम करने का अन्दाज़ आते ही दिखाना शुरु कर दिया है। उन्होने अपनी पहली पत्रकार वार्ता के ठीक बाद शहर के सारे थानों पर जाकर अपने आ जाने का अहसास करा दिया। यही नही फतेहपुर सिकरी क्षेत्र मे शोभा यात्रा को लेकर हगांमा कर रहे लोगों को भी खुद जाकर समझाया।
पहले दिन ही कप्तान का रुख देखकर उनके मातहत उनकी कार्यशैली को देखकर हैरान हो गये। 1993 बैच के आईपीएस प्रेम प्रकाश हमेशा से अपने बिन्दास अन्दाज़ के लिये जाने जाते है। वो बेसिक पुलिसिंग और ट्रड़िशनल पुलिसिंग के लिये भी अपनी पहचान बनायें हुये हैं। प्रदेश के कई प्रमुख शहरों मे एसएसपी रह चुके प्रेम प्रकाश अब आगरा की जनता को भयमुक्त समाज और पुलिस को उनका सहयोगी बनाने की मुहीम का आगाज़ कर चुके हैं। जिसका उदहारण पुलिस कार्यालय और थानों मे लगाये गये घण्टों को देख कर लगाया जा सकता है। ये पुलिस की एक पुरानी परम्परा है। एसएसपी ने हर आधे घण्टे पर घण्टा बजाने के आदेश भी जारी कर दिये। जो पुलिस की सजगता का प्रतीक है। उनके आदेशों के बाद आरआई रमेश चन्द इस काम क पूरा करने मे जुट गये हैं। एसएसपी कहतें है ये तो आगाज़ है अभी तो आगे-आगे देखीये होता है क्या ?

Thursday, October 9, 2008

जारी है हिरणों के मरने का सिलसिला

आगरा। सिकन्दरा मे हिरनों के मरने का सिलसिला जारी है। बुधवार की शाम भी वहां दो हिरन मरे हुये पाये गये। गौरतलब है कि इससे पहले भी लगभग एक दर्जन से ज्यादा हिरन यहां मर चुके हैं। इसके बाद से ही इस बात की जांच की जा रही है कि आखिर लगातार हिरनों के मरने की वजह कौन सी बिमारी हो सकती है। लेकिन इस जांच की रफ्तार इतनी सुस्त है कि अभी तक कोई नतीजा नही निकला। और दो हिरन मौत के मुंह मे चले गये। इस मामले पर जिला प्रशासन और एएसआई लगातार नज़र रख रहे हैं। विशेषज्ञों को जांच सौंपी गयी है लेकिन रिपोर्ट कब आयेगी ये किसी को नही पता।

पुलिस के लिए चुनोती

आगरा। शहर के एक बड़े जूता व्यापारी और निर्यातक की नई सफारी कार का चोरी हो जाना पुलिस के लिये चुनौती बन गया है। शहर मे पिछले कई महिनों से वाहन चोरी की घटनाऐं हो रही हैं। लेकिन पुलिस ऐसे मामलों मे नाकाम ही दिख रही है।
तीन दिन पहले आगरा शहर के मशहूर जूता व्यापारी और निर्यातक शफीक खान अपनी नई सफारी कार को टीडीआई मॉल के बाहर पार्क करने के बाद जब दस मिनट बाद लौटकर आये तो गाड़ी वहां से गायब थी। इस बात की सूचना उन्होने तुरन्त ताजगंज थाने को दी। तब से आज तक चार दिन बीत चुके हैं पर गाड़ी का कुछ अता-पता नही है। गौरतलब है कि शफीक खान छावनी क्षेत्र के विधायक ज़ुल्फीकार अहमद भुट्टो के दोस्त और रिश्तेदार है जिसके चलते पुलिस पर खासा दबाव बना हुआ है। पुलिस के मुताबिक गाड़ी की बरामदगी करने के लिये एसओजी की टीम को लगाया गया है।

Tuesday, October 7, 2008

सो गया "जागता शहर"

आगरा। यंहा से प्रकाशित होने वाली साप्ताहिक पत्रिका "जागता शहर" के सम्पादक अनिल शुक्ला ने तीसरे अंक के प्रकाशन से पहले ही इस्तीफा दे दिया। इसके पीछे की वजह गैरसम्पादकीय विभागों का उनके काम मे हस्तक्षेप करना बताया जा रहा है। हालाकि वहां पर चल रही अन्दरुनी राजनीति भी इसका कारण हो सकती है।
हाल ही में आगरा के एक कालीन व्यवसाई नवल किशोर पाड़ें और अशोक पांड़े ने मिलकर ऑफबीट मीड़िया ग्रुप बनाया और इसी के बैनर तले इस पत्रिका का प्रकाशन शुरु किया था। लेकिन टीम के नाम पर उनके पास कुछ माह पहले अमर उजाला से निकाले गये जय प्रकाश त्रिपाठी और दैनिक जागरण से बाहर किये गये अमी आधार निड़र हैं। ये दोनों ही अपनी कारगुज़ारियों के चलते आगरा की मीड़िया मे चर्चित रहते हैं। शुक्ला जी इन दोनों की दखल अन्दाज़ी से परेशान चल रहे थे। गौरतलब है कि इस पत्रिका को शुरु करने का आईडिया अनिल शुक्ला के पास काफी समय से था। जानकारों का कहना है कि किसी भी पत्रिका या पत्र को चलाने के लिये समाचार सामग्री के साथ-साथ अच्छी छवि के पत्रकार भी ज़रुरी होते हैं। आगरा के पत्रकारों के मुताबिक "जागता शहर" जागने से पहले ही सो गया।

Sunday, October 5, 2008

राज ने थामा कांग्रेस का हाथ

आगरा। अभिनेता, सांसद राज बब्बर आज अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस में शामिल हो गए। उन्होंने आगरा के तारघर मैदान में आयोजित एक रैली में पार्टी में आने की घोषणा की। इस रैली के माध्यम से राज बब्बर ने एक बार फ़िर अपनी ताक़त के अहसास कराया।
सुबह से ही उनके समर्थक तारघर मैदान में जमा होने लगे थे। भारी भीड़ देखकर कांग्रेस की प्रदेश प्रमुख रीता बहुगुणा और पार्टी प्रभारी दिग्विजय सिंह भी खास उत्साहित नज़र आ रहे थे। दोनों नेताओं ने रैली के दोरान पार्टी और राज बब्बर की तारीफों के पुल बांधे।
राज बब्बर ने भी कांग्रेस की तारीफ करने में कोई कसर नही छोड़ी। सपा का दमन छोड़ने के बाद से ही राज बब्बर किसी सही मौके का इंतज़ार कर रहे थे जो उन्हें कांग्रेस ने दे दिया। आगरा लोक सभा आरक्षित हो जाने के बाद राज बब्बर अब फतेहपुर सिकरी से अपनी किस्मत आजमाएंगे। उनका कडा मुकाबला भाजपा के पूर्व विधायक अरिदमन सिंह से माना जा रहा है। बहरहाल रैली तो सफल हो गई लेकिन राज बब्बर को चुनाव में सफलता मिलेगी या नही ये बात ज़्यादा अहम् होगी।

Saturday, October 4, 2008

जायें तो जायें कहां........


आगरा। बेपनाह मौहब्बत की अनमोल निशानी ताजमहल..... एक शंहशाह की प्यार की निशानी ताजमहल..... जो हर पल याद दिलाता है मौहब्बत के उस जज़्बे की जिसकी खातिर शाहजंहा ने दुनिया को ताजमहल की शक्ल मे एक शाहकार दिया। पूरी दुनिया मे ताज को मौहब्बत की मिसाल माना जाता है। लेकिन कोई सोच भी नही सकता कि आज ताजमहल की वजह से कई हजार लोग परेशान हो रहें हैं।
दरअसल, ताजगंज के आस-पास इस परेशानी का आगाज़ रात मे ताज को खोले जाने से शुरु हुआ। ताजमहल को रात मे खोले जाने के लिये तीन साल पहले प्रशासन ने कड़ी मशक्कत की। नतीजन सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कड़ी शर्तों के साथ ताज को रात मे खोले जाने की इजाज़त दे दी। आगरा पुलिस और प्रशासन के लिये भी ये किसी चुनौती से कम नही है। सुप्रीम कोर्ट ने सबसे अहम शर्त सुरक्षा को लेकर रखी थी। स्थानीय पुलिस, प्रशासन और ताज की आन्तरिक सुरक्षा का जिम्मा उठाने वाली सीआईएसएफ ने इसका खाका तैयार किया। इस योजना के तहत रात के वक्त ताज खुलने पर पूर्वी गेट से दशहरा घाट और प्रचीन मन्दिर को तरफ जाने वाले रास्ते को चार घण्टे के लिये पूर्वी तरह से बन्द किये जाना शामिल है। ताज के पूर्वी गेट के पार रहने वालों के लिये हर माह रात मे पांच दिन ताज खुलना बड़ी परेशानी का सबब बन गया। जब इस योजना पर अमल शुरु किया गया तो उन चार घण्टो के दौरान दशहराघाट प्राचीन मन्दिर, हजरत अहमद बुखारी की दरगाह, अहमद बुखारी कब्रिस्तान, राजीव नगर, वासुदेव कॉलोनी, फोरेस्ट कॉलोनी, जालमा कुष्ठ आश्रम के अलावा ग्राम नगला पैमा, गढी बंगज और नगला कल्फी का आने-जाने का रास्ता पूरी तरह से बन्द होने लगा है। इन जगहो पर रहने वालों की तादाद लगभग पन्द्रह हजार है। रास्ता बन्द किये जाने से ये लोग एक बन्धक की तरह हो जाते हैं। इन इलाकों मे जाने के लिये कोई और वैकल्पिक मार्ग भी नही है। इस परेशानी को लेकर कई बार प्रभावित लोगों ने आवाज़ उठाई लेकिन कोई नतीजा नही निकला।
पिछले तीन सालों मे आगरा की पर्यटन विकास समिति और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इस परेशानी को लेकर आवाज़ बुलन्द की पर हर बार सिवाय आश्वासनों के उन्हे कुछ नही मिला। समिति के अध्यक्ष एंव कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैय्यद इब्राहिम जै़दी कहते है कि उन्होने पहले दिन से ही इस मामले को लेकर अधिकारियों से बात की थी। तब भी उन्हे केवल आश्वसन मिला था और आज भी हालात जैसे के तैसे है। इस समस्या के चलते कई बार हालात बड़े संगीन हो जाते है। सुरक्षा कारणों से ना तो फोर व्हीलर और ना ही टू व्हीलर इस इलाके मे नही जा सकते। यहां तक कि रिक्शा, साईकिल और पैदल व्यक्ति भी उस चार घण्टे के दौरान वहां से नही जा सकते। जैदी के नेतृत्व मे पूर्वी गेट मार्ग की जगह एक वैकल्पिक मार्ग बनाये जाने की मांग भी लम्बे समय से की जा रही है। जै़दी के मुताबिक दिन मे भी बिना पास के कोई वाहन इस रास्ते से नही गुज़र सकता। यही नही बल्कि स्कूल रिक्शा, पानी के टैंकर, दूध सप्लाई वाले वाहन या ज़रुरत की सामान ले जाने वाले अन्य वाहन भी इस इलाके मे नही आ-जा सकते। जिस वजह से कई तरह की दिक्कतें पेश आती हैं। ताजगंज निवासी रामप्रकाश बघेल के मुताबिक उस चार घण्टे के दौरान और कई बार दिन मे भी चिकित्सा सुविधा से वंचित रह जाने के कारण कई लोग मौत के मुंह मे भी जा चुके हैं। लेकिन प्रशासन के कानों पर जूं तक नही रेंगती।
रात मे ताज के दिदार करने वालों की संख्या अब केवल नाम मात्र की रह गयी है लेकिन इन्तज़ाम चार घण्टे के लिये ही किये जाते है। सैकंड़ो पुलिसकर्मी इस दौरान शिल्पग्राम से लेकर ताज के पूर्वी गेट तक तैनात किये जाते हैं। सुरक्षा का आलम ये होता है कि परिन्दा भी पर ना मार सके। लेकिन इस बीच पूर्वीगेट के पार रहने वाले लोग चाहें लुटे या मरे लेकिन वो इस रास्ते से पार नही जा सकते। दशहरा घाट प्राचीन मन्दिर के पुजारी बताते हैं कि कई बार तो ऐसा होता है कि इस पार के लोग अन्तिम संस्कार के लिये शव लेकर जा रहे है लेकिन रास्ता बन्द होने की वजह से उन्हे घण्टो इन्तज़ार करना पड़ता है। उनके मुताबिक आगरा प्रशासन ने बिना सोचे समझे ये रास्ता बन्द किये जाने की योजना बना ड़ाली। जिसका खामियाज़ा हम लोग भुगत रहे हैं।
आगरा प्रशासन के अधिकारी पूछे जाने पर बताते हैं कि इस समस्या पर विचार कर योजना बनाई जा रही है। जिसके तहत जल्द ही एक वैकल्पिक मार्ग बनाया जायेगा जो इन लोगों की परेशानी को दूर करेगा। इस मार्ग को बनाये जाने का प्रस्ताव पास तो हो गया है लेकिन ये मार्ग कब बनेगा इसका जवाब फिलहाल इन अधिकारियों के पास नही है। यहां के जनप्रतिनिधियों के पास भी इस मामले को लेकर कोई खास जवाब नही है। स्थानीय विधायक जुल्फिकार अहमद भुट्टो हर बार परेशान लोगों को जल्द ही रास्ता बना लिये जाने का आश्वासन दे रहे हैं। पर रास्ता बनना कब शुरु होगा ये उन्हे भी नही पता। पिछले तीन साल ये मामला लगातार सुर्खीयों मे रहा है लेकिन इस परेशानी से दो-चार हो रहे लगभग पन्द्रह हज़ार लोग अभी तक उस राह की बाट जोह रहे है जो उनको नया रास्ता दिखायेगी।

आँखे बेचने वाले गिरोह का पर्दाफाश

पटियाला। पंजाब के पटियाला शहर में एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है जो पोस्‍टमार्टम के लिए आए शवों की आंखें निकालकर उन्‍हें बेच देता था। यह गौरखधंधा पटियाला शहर के एक चैरिटीबल अस्‍पताल में चल रहा था। यहां जो शव पोस्‍टमार्टम के लिए लाए जाते थे, उनकी आंखें निकाल ली जाती थीं। बाद में इन्‍हें बेच दिया जाता था।
पंजाब पुलिस को जब इस बात की जानकारी मिली तो उसने अस्‍पताल पर छापा मारा। इस सिलसिले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें दो डॉक्‍टर भी शामिल हैं। बताया जाता है कि इस गिरोह में शामिल एक ड्राइवर आंखों को बेचता था। पुलिस का कहना है कि इस धंधे में और लोग भी शामिल हो सकते हैं।

Friday, October 3, 2008

शीला के बयान पर बवाल

दिल्ली। युवा टीवी पत्रकार सौम्या विश्वनाथन की हत्या के मामले दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बयान पर विवाद खड़ा हो गया है. मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने सौम्या की हत्या पर दुख प्रकट किया लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि "बहुत ज्यादा साहस दिखाना अच्छा नहीं है."
उन्होंने कहा, "लोगों को इतना एडवेंचरस नहीं होना चाहिए, मुझे उनके परिवार के बारे में सोचकर बहुत बुरा लग रहा है, जाँच अभी चल रही है. वो एक ऐसे शहर में सुबह के तीन बजे अकेले गाड़ी चलाकर जा रही थी जहाँ रात के अंधेरे में महिलाओं का निकलना बहुत सुरक्षित नहीं माना जाता, मुझे लगता है कि हमें थोड़ा एहतियात बरतना चाहिए. मैं सचमुच बहुत दुखी हूँ"
मंगलवार की सुबह 26 वर्षीय सौम्या की दिल्ली में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी, वे टीवी टुडे के चैनल हेडलाइंस टुडे की पत्रकार थीं। हेडलाइंस टुडे से पहले वे सीएनएन आईबीएन में भी काम कर चुकी थीं.
शीला दीक्षित के इस बयान के बाद कई संगठनों ने ज़ोरदार विरोध प्रकट किया है, लोगों ने कई वेबसाइटें बनाई हैं जिन पर सौम्या के क़ातिल को पकड़ने और उनके परिवार को न्याय दिलाने की माँग की जा रही है. वे सोमवार की देर रात तक दफ़्तर में काम कर रही थीं, मालेगाँव और मोडेसा के धमाकों पर रिपोर्ट तैयार करते-करते उन्हें काफ़ी देर हो गई थी. वे मध्य दिल्ली के अपने दफ़्तर से अपने घर वसंत कुंज जा रही थीं जो दक्षिण दिल्ली में है. सौम्या ने हत्या से ठीक पहले सवा तीन बजे अपने पिता से फोन पर बात की थी और उनसे कहा था कि वे जल्द ही घर पहुँचने वाली हैं. पुलिस को ड्राइवर वाली सीट पर सौम्या अचेत अवस्था में मिलीं, उनके सिर में गोली लगी थी और अस्पताल पहुँचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया.
पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया है लेकिन हत्या की वजह या हत्यारे के बारे में कुछ पता नहीं चल सका है. उनकी गाड़ी में संघर्ष के निशान दिखाई पड़ रहे थे और उनकी कार का एक टायर भी पंचर हो गया था, कार की ट्यूब में से पुलिस ने एक गोली बरामद की है. दक्षिणी दिल्ली के पुलिस उपायुक्त एचएस धालीवाल ने पत्रकारों से बातचीत में कहा है कि वे इस हत्या की गुत्थी को जल्द ही सुलझाए जाने की उम्मीद करते हैं.
साभार- बीबीसी

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