नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने भाजपा नेता वरुण गांधी के कथित भड़काऊ भाषण के मामले में भविष्य की उसकी रैलियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाने के आदेश जिये हैं। साथ ही, आयोग ने वरुण के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई नहीं करने के आरोप में पीलीभीत के अतिरिक्त ज़िलाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक का तबादला कर दिया है। आयोग के मुताबिक वरुण ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। ग़ौरतलब है कि वरुण गांधी पर आरोप है कि पीलीभीत में चुनाव प्रचार के दौरान छह मार्च को उन्होंने कथित रुप से भड़काऊ भाषा में मुसलमानों के ख़िलाफ़ टिप्पणियाँ की थीं। चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद वरूण गांधी के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है, जो कि दो समुदायों के बीच वैमनस्य भड़काने के मामले में चलाया जाता है। आयोग ने वरुण को नोटिस जारी कर आरोपों पर स्पष्टीकरण भी माँगा है। उधर भारतीय जनता पार्टी ने वरुण गांधी के कथित भड़काऊ भाषण से ख़ुद अलग करते हुए कहा कि वह उनके बयान से सहमत नहीं है। बुधवार को दिल्ली में भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवददाताओं से कहा, "मीडिया में वरुण के जो कथित बयान दिखाए गए हैं, भाजपा उसको उचित नहीं मानती और उससे अपने को अलग करती है।" रविशंकर प्रसाद का कहना था कि ख़ुद वरुण ने सीडी के साथ छेडछाड़ की बात कही है और चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस दिया है और वो उसके जवाबदेह हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सिलसिले में भाजपा को कोई नोटिस नहीं आया है। उधर वरुण गाँधी ने कथित भड़काऊ भाषण को अपना मानने से इनकार करते हुए कहा है कि उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया है। उन्होंने दिल्ली में मीडिया के सामने आकर कहा कि जो सीडी दिखाई जा रही है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और उसमें जो भाषण दिखाया गया है उसमें न तो शब्द उनके हैं और न आवाज़ उनकी है। इस विवाद के आने के बाद जहाँ भाजपा ने अधिकारिक स्तर पर वरुण के बयान से ख़ुद को अलग कर लिया है, वहीं पार्टी के उपाध्यक्ष वैंकया नायडू ने वरुण का बचाव किया है। उनका कहना था, "वरुण ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जो सांप्रदायिक हो, जो सीडी मीडिया में दिखाई जा रही है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और वो मनगढ़ंत है। पार्टी पहले ये जानेगी कि असल में वरुण ने कहा क्या है।"
Wednesday, March 18, 2009
वरुण गांधी पर लटकी चुनाव आयोग की तलवार
नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने भाजपा नेता वरुण गांधी के कथित भड़काऊ भाषण के मामले में भविष्य की उसकी रैलियों की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई जाने के आदेश जिये हैं। साथ ही, आयोग ने वरुण के ख़िलाफ़ उचित कार्रवाई नहीं करने के आरोप में पीलीभीत के अतिरिक्त ज़िलाधिकारी और पुलिस उपाधीक्षक का तबादला कर दिया है। आयोग के मुताबिक वरुण ने चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन किया है। ग़ौरतलब है कि वरुण गांधी पर आरोप है कि पीलीभीत में चुनाव प्रचार के दौरान छह मार्च को उन्होंने कथित रुप से भड़काऊ भाषा में मुसलमानों के ख़िलाफ़ टिप्पणियाँ की थीं। चुनाव आयोग के हस्तक्षेप के बाद वरूण गांधी के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता की धारा 153-ए के तहत मामला दर्ज किया जा चुका है, जो कि दो समुदायों के बीच वैमनस्य भड़काने के मामले में चलाया जाता है। आयोग ने वरुण को नोटिस जारी कर आरोपों पर स्पष्टीकरण भी माँगा है। उधर भारतीय जनता पार्टी ने वरुण गांधी के कथित भड़काऊ भाषण से ख़ुद अलग करते हुए कहा कि वह उनके बयान से सहमत नहीं है। बुधवार को दिल्ली में भाजपा के प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने संवददाताओं से कहा, "मीडिया में वरुण के जो कथित बयान दिखाए गए हैं, भाजपा उसको उचित नहीं मानती और उससे अपने को अलग करती है।" रविशंकर प्रसाद का कहना था कि ख़ुद वरुण ने सीडी के साथ छेडछाड़ की बात कही है और चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस दिया है और वो उसके जवाबदेह हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस सिलसिले में भाजपा को कोई नोटिस नहीं आया है। उधर वरुण गाँधी ने कथित भड़काऊ भाषण को अपना मानने से इनकार करते हुए कहा है कि उनके ख़िलाफ़ राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया है। उन्होंने दिल्ली में मीडिया के सामने आकर कहा कि जो सीडी दिखाई जा रही है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और उसमें जो भाषण दिखाया गया है उसमें न तो शब्द उनके हैं और न आवाज़ उनकी है। इस विवाद के आने के बाद जहाँ भाजपा ने अधिकारिक स्तर पर वरुण के बयान से ख़ुद को अलग कर लिया है, वहीं पार्टी के उपाध्यक्ष वैंकया नायडू ने वरुण का बचाव किया है। उनका कहना था, "वरुण ने ऐसा कुछ भी नहीं कहा है जो सांप्रदायिक हो, जो सीडी मीडिया में दिखाई जा रही है उसके साथ छेड़छाड़ की गई है और वो मनगढ़ंत है। पार्टी पहले ये जानेगी कि असल में वरुण ने कहा क्या है।"

