
वेटिकन सिटी। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित पत्रिकाओं में से एक 'द लांसेंट' ने पोप बेनेडिक्ट पर आरोप लगाया है कि उन्होंने कंडोम के इस्तेमाल पर दिए गए अपने बयान में वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी की है। लांसेट ने एक लेख के ज़रिए कहा है कि पोप का ताज़ा बयान ग़लत है जिसमें उन्होंने कहा था कि कंडोम एचआईवी, एड्स की समस्या को बढ़ा सकता है। पोप ने कहा था कि इस भयानक बीमारी से निपटने में कंडोम के बदले संयम ज़्यादा कारगर है।अफ़्रीका के अपने पहले दौरे के दौरान पोप ने कहा था, "एड्स ऐसी त्रासदी है जिसे सिर्फ़ पैसे के बल पर ख़त्म नहीं किया जा सकता। इसे कंडोम का वितरण करके भी समाप्त नहीं किया जा सकता बल्कि इससे तो समस्या और भी बढ़ सकती है।" पोप ने कहा, "चर्च की परंपरागत सीख ही एचआईवी/ एड्स से पूर्ण बचाव का एकमात्र उपाय साबित हुई हैं।" चर्च का मानना है कि लोगों को कंडोम के इस्तेमाल के लिए प्रोत्साहित करने से मानव व्यवहार को पूरी तरह नहीं बदला जा सकता। लांसेट का कहना है कि पोप ने इस मुद्दे पर कैथोलिक सिद्धांतों को बढ़ावा देने के लिए सार्वजनिक रूप से वैज्ञानिक तथ्यों की अनदेखी की है। पत्रिका का कहना है कि कंडोम ही एचआईवी/ एड्स के प्रसार को कम करने का एकमात्र तरीका हैं। पत्रिका ने कहा, "यह स्पष्ट नहीं है कि यह पोप की अनदेखी है या कैथोलिक सिद्धांतों के समर्थन के लिए जानबूझ कर वैज्ञानिक तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा गया है।" लेकिन इसमें कहा गया है कि यह बयान अब भी वहीं का वहीं है इसलिए वैटिकन को इसे वापस लेना चाहिए। लांसेट ने कहा, "जब भी कोई धार्मिक या राजनीतिक पहुँच वाला महत्वपूर्ण व्यक्ति वैज्ञानिक रूप से ग़लत तथ्यों वाला बयान देता है जो करोड़ों लोगों के स्वास्थ्य के लिए विनाशकारी हो तो उसे इस बयान को वापस लेना चाहिए या जनता के सामने उसे सुधारना चाहिए।" इसका कहना है कि "पोप बेनेडिक्ट का यह बयान हज़ारों कैथोलिकों समेत जनता और उन स्वास्थ्यकर्मियों पर प्रभाव डालेगा जो एचआईवी/एड्स के बचाव के लिए अथक परिश्रम कर रहे हैं।"

