कोलम्बो। तमिल टाइगर्स प्रमुख वी. प्रभाकरण को मार गिराने की अंतिम लड़ाई शुरू हो चुकी है। एक लंबी लड़ाई के बाद श्रीलंकाई सेना ने उसे घेर लिया है। सरकार ने उसे सरेंडर करने की जो मियाद दी थी। वो पूरी हो चुकी है। सेना उत्तरी श्रीलंका के पुत्तूमतलन में 17 वर्ग किलोमीटर के दायरे में मौजूद प्रभाकरण के कब्जे वाले इलाके में घुस चुकी है। मिल रही जानकारी के मुताबिक सेना ने वहां एक अस्पताल को भी अपने कब्जे में ले लिया है। गौरतलब है कि श्रीलंकाई सरकार ने प्रभाकरण को 24 घंटे के अंदर सरेंडर करने को कहा था। ये अल्टीमेटम सोमवार को दिन बारह बजे से लागू हो गया था। सरकार ने ये अल्टीमेटम उत्तर-पूर्वी नो फायर जोन से 35 हजार आम लोगों के निकल जाने के बाद दिया। इस बीच श्रीलंका के उत्तरी युद्ध क्षेत्र में फंसे करीब 35,000 नागरिक सोमवार को सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे। ये लोग लिट्टे के नियंत्रण वाले इलाके में फंसे थे। सेना की मदद से मिली आजादी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायाक्कारा ने बताया कि नागरिकों को बचाने का अभियान लिट्टे से कड़े मुकाबले के बावजूद रविवार रात को शुरू किया गया। सेना ने पुथुमथालन इलाके में लिट्टे द्वारा बनाए गए 3 किलोमीटर लंबे मिट्टी के बांध पर भी कब्जा कर लिया। फंसे लोगों के सुरक्षित बच निकलने की वजह से सेना के कब्जे वाला इलाका लोगों से भर गए हैं। इनमें बच्चों की संख्या काफी है। इस बीच लिट्टे सेना प्रवक्ता का कहना है कि पलायन कर रहे नागरिकों पर एलटीटीई गोले दागकर हमला कर रहा हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा है कि सोमवार सुबह नागरिकों का पलायन रोकने के लिए लिट्टे ने एक आत्मघाती हमला भी किया। इसमें महिलाओं और बच्चों सहित 17 लोग मारे गए। सेना के अनुमान के अनुसार करीब 70 हजार नागरिक अभी भी तटीय इलाके में फंसे हुए हैं।
Tuesday, April 21, 2009
प्रभाकरण को मार गिराने की अंतिम लड़ाई शुरू
कोलम्बो। तमिल टाइगर्स प्रमुख वी. प्रभाकरण को मार गिराने की अंतिम लड़ाई शुरू हो चुकी है। एक लंबी लड़ाई के बाद श्रीलंकाई सेना ने उसे घेर लिया है। सरकार ने उसे सरेंडर करने की जो मियाद दी थी। वो पूरी हो चुकी है। सेना उत्तरी श्रीलंका के पुत्तूमतलन में 17 वर्ग किलोमीटर के दायरे में मौजूद प्रभाकरण के कब्जे वाले इलाके में घुस चुकी है। मिल रही जानकारी के मुताबिक सेना ने वहां एक अस्पताल को भी अपने कब्जे में ले लिया है। गौरतलब है कि श्रीलंकाई सरकार ने प्रभाकरण को 24 घंटे के अंदर सरेंडर करने को कहा था। ये अल्टीमेटम सोमवार को दिन बारह बजे से लागू हो गया था। सरकार ने ये अल्टीमेटम उत्तर-पूर्वी नो फायर जोन से 35 हजार आम लोगों के निकल जाने के बाद दिया। इस बीच श्रीलंका के उत्तरी युद्ध क्षेत्र में फंसे करीब 35,000 नागरिक सोमवार को सुरक्षित बच निकलने में कामयाब रहे। ये लोग लिट्टे के नियंत्रण वाले इलाके में फंसे थे। सेना की मदद से मिली आजादी सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर उदय नानायाक्कारा ने बताया कि नागरिकों को बचाने का अभियान लिट्टे से कड़े मुकाबले के बावजूद रविवार रात को शुरू किया गया। सेना ने पुथुमथालन इलाके में लिट्टे द्वारा बनाए गए 3 किलोमीटर लंबे मिट्टी के बांध पर भी कब्जा कर लिया। फंसे लोगों के सुरक्षित बच निकलने की वजह से सेना के कब्जे वाला इलाका लोगों से भर गए हैं। इनमें बच्चों की संख्या काफी है। इस बीच लिट्टे सेना प्रवक्ता का कहना है कि पलायन कर रहे नागरिकों पर एलटीटीई गोले दागकर हमला कर रहा हैं। रक्षा मंत्रालय ने एक रिपोर्ट में कहा है कि सोमवार सुबह नागरिकों का पलायन रोकने के लिए लिट्टे ने एक आत्मघाती हमला भी किया। इसमें महिलाओं और बच्चों सहित 17 लोग मारे गए। सेना के अनुमान के अनुसार करीब 70 हजार नागरिक अभी भी तटीय इलाके में फंसे हुए हैं।

