मुजफ्फरनगर। लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी के समक्ष समाजवादी पार्टी सांसद मुनव्वर हसन के खिलाफ पर्याप्त सुबूत नहीं दे पाई। अब इस मामले में आगामी 12 नवंबर को सुनवाई होगी। मुनव्वर का कहना था कि समाजवादी पार्टी ने परमाणु मसले पर संसद में मतदान के समय जो व्हिप जारी किया था, वह उन्हें मिला ही नहीं, इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती।गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर के सांसद मुनव्वर हसन आने वाले लोकसभा चुनाव में कैराना सीट पर बसपा के बैनर पर अपनी किस्मत आजमाने वाले हैं। खुद मायावती उन्हें बसपा का कैराना लोकसभा प्रभारी घोषित कर चुकी हैं। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी मुनव्वर हसन की सांसदी को चुनौती दे रही है। दरअसल समाजवादी पार्टी का आरोप है कि हसन सपा के बैनर पर सांसद बने थे और इसलिए उन्हें मतदान के समय पार्टी की ओर से जारी किए गए व्हिप का पालन करना चाहिए था। इस मामले पर समाजवादी पार्टी की ओर से रामगोपाल यादव पैरवी कर रहे हैं। पिछली तारीख पर भी यही मसला उठा था। हालांकि एक बार मुनव्वर अस्वस्थ होने के कारण तारीख पर नहीं जा पाए थे। इस मामले में लोकसभा स्पीकर सोमनाथ चटर्जी ने 30 अक्टूबर की तिथि तय की थी। मुनव्वर हसन के प्रतिनिधि वीर सिंह मलिक ने बताया कि ठीक चार बजे दोनों पक्ष चटर्जी के समक्ष पेश हुए। रामगोपाल यादव का कहना था कि हसन सपा के सांसद हैं और उन्होंने व्हिप का पालन नहीं किया। हसन का तर्क था कि व्हिप उन्हें दिया ही नहीं गया। इस मसले पर स्पीकर ने यादव को आगामी 12 नवंबर तक पर्याप्त सुबूत लेकर आने के लिए कहा। विदित हो कि हसन ने परमाणु करार पर मतदान के समय यह बयान देकर तहलका मचा दिया था कि समाजवादी पार्टी ने उन्हें 25 करोड़ रुपये की आफर देकर सरकार के पक्ष में मतदान करने को कहा है। हालांकि उन्होंने यह आफर ठुकरा दिया। यह बयान हसन ने जागरण से विशेष बातचीत में दिया था और बाद में यह बहुत बड़ा इश्यू बना। अखबारों की प्रतियां लोकसभा में लहराई गई थी। हसन के बाद कुछ और सांसदों ने भी पैस की आफर देने की बात कही थी। फिलहाल हसन की सांसदी कम से कम 12 नवंबर तक तो बच ही गई।

