Saturday, November 1, 2008

अपने चेहरे से जो जाहिर है छुपाएं कैसे...

लखनऊ। संगीत नाटक अकादमी गोमतीनगर के नये प्रेक्षागृह में ठुमरी और गजल की साम्राज्ञी पद्मभूषण बेगम अख्तर की स्मृति में संगीत नाटक अकादमी की ओर से 'यादें' शीर्षित कार्यक्रम में मुम्बई की गायिका इंदिरा नाइक के गजल और ठुमरी गायन का कार्यक्रम रखा गया था। इंदिरा नाइक के शुरुआत वसीम बरेलवी के कलाम- 'अपने चेहरे से जो जाहिर है छुपाएं कैसे, तेरी मर्जी के मुताबिक नजर आएं कैसे' से किया। इस क्रम को उन्होंने- 'अपनी नजर-नजर में..' और 'मैंने लाखों के बोल सहे सितमगर तेरे लिए..' जैसे कलामों से आगे बढ़ाया। आगे उन्होंने बेगम अख्तर की गाई चंद गजलों को भी अपनी आवाज दी। उनके साथ तबले पर रत्नेश मिश्र, सारंगी पर अली अहमद और हारमोनियम पर कृष्णानंद ने संगत की। गायिका का परिचय तरुण राज ने कराया।

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