देवबंद (सहारनपुर)। हमारे यहां भूत-प्रेत, काला जादू, टोने का इलाज गारंटी से किया जाता है। इस तरह का प्रचार प्रसार हर बड़े-छोटे शहर, कस्बों में जगह जगह बड़े बड़े होर्डिंग, बोर्ड लगाकर किया जाता है, लेकिन दारुल उलूम से हाल ही में जारी एक फतवे में जादू टोने को नाजायज करार दिया गया है।दारुल उलूम के आन लाइन फतवा विभाग से एक व्यक्ति ने 19 अक्टूबर को फतवा मांगा कि जो शख्स जादू टोना किसी दूसरे पर करता है तो इस इंसान के लिए क्या ताकीद है और उस पर क्या गुनाह होगा? अगर जादू टोना किसी अच्छे काम के लिए किया जाए जैसे कि किसी लड़की का दिमाग बहुत हल्का है जो थोड़ी बहुत बात पर किसी पर भी हाथ उठा देती है और अक्सर कई मौके ऐसे होते हैं जिसमें कोई पागल हो या किसी के अंदर जिन या चुड़ैल का असर हो।
जवाब में फतवा विभाग के मुफ्ती-ए-कराम ने फतवा संख्या 1465-1707 के माध्यम से शरीयत की रोशनी में जवाब देते हुए कहा कि यह हराम काम का प्रतीक है और ऐसा करने वाला फासिक, फाजिर और जालिम है अर्थात जादू टोना करना नाजायज है तथा ऐसा करने वाले को गुनाह-ए-कबीरा व जालिम की श्रेणी में रखा जाता है। इतना ही नहीं अगर वह कुरान व हदीस के खिलाफ कोई अमल करता है भले ही वह कार्य अच्छे काम के लिए हो फिर भी ऐसा अमल करना जायज नहीं है। उक्त फतवे का समर्थन किया है।

