Saturday, October 25, 2008

जेल मे दुकान....

पटना। कैदियों को चीनी, नमक, ब्लेड, मोमबत्ती या दैनिक जरूरत की दूसरी चीजें जेल में ही उपलब्ध हो जाएंगी। जेलों को सुधार गृह बनाने की परिकल्पना के बीच सरकार जेलों में जनरल स्टोर खोलने जा रही है। हालांकि कैदियों को उनकी जरूरत का सामान लेने को पैसे अदा करने होंगे।

कैदियों के प्रति मानवाधिकार को लेकर बढ़ते दबाव के बीच जेलों में लगातार सुविधाओं में वृद्धि हो रही है। कुछ जेलों में लाइब्रेरी खोले गए हैं। योग के क्लास चल रहे हैं। बच्चों के खेल-कूद के लिए झूले की व्यवस्था हुई और हो रही है। कुछ माह पूर्व पटना सहित कतिपय जेलों में सुधार के बूथ खोले गए हैं जहां से बंदी दूध, पेड़े, लस्सी का लुत्फ उठा रहे हैं। खास बात यह भी जेलों में बंद महिला कैदियों के लिए सेनेटरी नैपकिन की भी आपूर्ति की जाने वाली है। मानवीय दृष्टिकोण से इस दिशा में पहल की गयी है। पहली बार किसी जेल में इसकी आपूर्ति होगी। सेनेटरी नैपकिन या जनरल स्टोर के बारे में विभिन्न प्रक्रियाएं पूरी हो चुकी हैं। थोड़ी सी औपचारिकता के बाद इसे लागू कर दिया जाएगा।
जानकार बताते हैं कि जेलों में खाना बनाने के लिए भोजन सामग्री आपूर्ति की अपनी व्यवस्था है। उसका अलग 'अर्थ तंत्र' है। जिससे आपूर्ति और खपत के सिस्टम में गैप आता रहता है। इस व्यवस्था के कारण नमक, चीनी जैसी मामूली मगर जरूरी चीजों के लिए कैदियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जेल विभाग से जुड़े सूत्रों ने बताया कि जेल में दरी-कालीन बनाने, बेकरी और दूसरे तरह के कारखाने संचालित हैं। इसके अतिरिक्त दूसरे तरह के काम करने होते हैं जिसके एवज में कैदियों को पैसे मिलते हैं। यह राशि जेल अधिकारी के पास ही जमा हो जाते हैं। जेलों में पारचूनी दुकान खोलने से लोगों को जरूरत की चीजें मिल जाएंगी तो जेल अधिकारी के पास जमा पैसे से उसका भुगतान हो जाएगा।

RAWA News