आगरा। अपराधियों पर अंकुश लगाने वाली पुलिस अब बिछड़े दिलों को मिलाने का काम भी कर रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशानुसार आगरा पुलिस ने भी घरेलू मामलों को थाने की चारदिवारी के बाहर निपटाने की कवायद ज़ोरशोर से शुरु कर दी है। पिछले चार हफ्तों से पुलिस लाईन मे परिवार परामर्श केन्द्र संचालित किया जा रहा है। जिसमें कई बिछड़े जोड़ों को फिर से एक कर दिया गया।आगरा के पुलिस अधीक्षक (अपराध) अशफाक अहमद की अध्यक्षता मे शुरु किया गया केन्द्र अब एक बड़े परिवार का रूप ले चुका है। जनपदभर से आये घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न जैसे मामलों को निपटाने के लिये 50 सदस्यों की एक टीम तैयार की गयी है। जिसमे शहर के चुनिन्दा लोगों को शामिल किया गया है जो ऐसे लोगों को कांउसलिंग दे सकें। केन्द्र के सभी सदस्यों को कांउसलिंग का विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया है। हर रविवार को लगने वाले कांउसलिंग शिविर मे परिवारों को एक करने पर ज़ोर दिया जा रहा है। अदालत मे विचाराधीन मामलों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। पुलिस अधीक्षक अशफाक अहमद इस तरह के केन्द्र चलाने मे माहिर माने जाते हैं। गौरतलब है कि अपने एटा कार्यकाल के दौरान उन्होने प्रोजेक्ट दीदी के माध्यम से इस तरह के मामलों को निपटाने का नया कीर्तिमान स्थापित किया था। अभी तक लगभग एक दर्जन से अधिक जोड़ों मे समझौता कराया गया है। इसकी सफलता के चलते इसमे आने वाले मामलों मे हर सप्ताह बढोत्तरी हो रही है और थानों के साथ-साथ अदालतों का बोझ भी कम होता जा रहा है। आगरा परिवार परामर्श केन्द्र के सदस्यों मे प्रख्यात टीवी एंकर नन्दिनी सिंह, पर्यटन एंव समाजसेवी सैय्यद इब्राहिम हुसैन जै़दी, आरजे अखलाक अहमद, महिला कार्यकर्ता सरोज गौड़, गौरव गुप्ता, एड़वोकेट अंजलि, मंजू गुप्ता, इसरार हुसैन, विनय पुरवाल, हाजी जमीलुद्दीन कुरैशी, मुकेश गुप्ता, सुरेखा खत्री, रानी गुप्ता और मंजुला सिंह आदि के नाम प्रमुख है।

