Saturday, October 25, 2008

बिक सकता है एक मासूम

अलीगढ़। एक मां के लिए इससे बड़ा दुख और क्या हो सकता है कि उसे अपने मासूम बच्चे को बेचने का निर्णय लेने के लिए मजबूर होना पड़े। दरअसल इसकी विवशता यह है कि उसे ससुराल वाले ठुकरा चुके हैं और मायके वालों ने मुंह मोड़ लिया है। वह अपने दो बच्चों की परवरिश नहीं कर सकती। मानसिक रूप से अस्वस्थ यह महिला दो बार खुदकुशी का प्रयास कर चुकी है। अब महिला सेल में उसने न्याय की गुहार लगाई है। यदि कहीं से सहारा न मिला तो उसे अपनी बच्ची को पांच हजार रुपये में बेचने को मजबूर होना पड़ेगा।
यह पीड़ा नगला जाहर, लेखराज नगर निवासी पुष्पा की है, जिसकी शादी बारह साल पहले रेलवे रोड निवासी गगन से हुई थी। पुष्पा के पास चार साल का पुत्र व आठ माह की पुत्री है। पुष्पा मिर्गी रोग से पीड़ित है। एक रोगी को समुचित इलाज मिलने के साथ भावनात्मक संबल भी जरूरी होता है, मगर उसे हर तरफ से ठोकरें मिल रही हैं। इसके चलते वह कभी-कभी आपा खो बैठती है। ऐसी हरकतें करने लगती है कि लोग उसे विक्षिप्त मान लेते हैं। इसी वजह से पुष्पा का अपने पति व ससुराल वालों से विवाद होता रहता था। हालत यह हो गई कि पति उसे छोड़कर मुंबई चला गया। तब से वह अपने दोनों बच्चों के साथ मायके में रहने आ गई। हालांकि मायके वालों ने उसका इलाज भी कराया, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। पति के मुंह मोड़ने और बीमारी से त्रस्त पुष्पा ने दो बार आग लगाकर खुदकुशी करने का प्रयास भी किया। एक बार तो उसकी इसी नासमझी के चलते घर में आग लग गई थी, जिसे बुझाने के लिए दमकल बुलानी पड़ी थी। इन वजहों से मायके वालों ने भी उससे मुंह मोड़ना शुरू कर दिया। उसने खुद को तो हालात के हवाले कर दिया, मगर दो बच्चों की परवरिश की चिंता उसे सताने लगी है। जब कोई चारा न सूझा तो उसने मायके में रहते हुए ही अपने पति के खिलाफ दहेज उत्पीड़न की शिकायत की। आरोप लगाया कि दहेज की मांग पूरी न होने पर ससुराल वालों ने उसे घर से निकाल दिया है। शुक्रवार को उसे मायके से भी निकाल दिया गया तो वह दोनों बच्चों के साथ महिला सेल जा पहुंची। वहां उसका कहना था कि वह पति के साथ रहना चाहती है, मगर पति की बेरुखी के बाद अब मायके में भी रह पाना मुश्किल हो रहा है। उसकी पीड़ा हर किसी को झकझोर देने वाली थी। उसका कहना था कि बच्चों की परवरिश उसके लिए भारी साबित हो रहा है। बेटी के लिए दूध तक को रुपये नहीं हैं। उसकी बेटी के उसे पांच हजार रुपये मिल रहे हैं। वह उसे किसी अच्छे परिवार कों सौंपना चाहती है ताकि उसका जीवन संवर सके। मासूम बच्ची व महिला की दशा देख हर कोई अचंभित था। महिला सेल प्रभारी अंजू तेवतिया ने एक सिपाही को पुष्पा के मायके भेजा ताकि वे पुष्पा को घर ले जाएं परंतु वहां से कोई आने को तैयार नहीं हुआ। महिला सेल प्रभारी ने बताया कि पुष्पा के मायके वालों ने साफ कह दिया कि वे पुष्पा की हरकतों से आजिज आ चुके हैं और अब वे उसे घर पर नहीं रख सकते।

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